चिंगारी
जब आग की धूनी जलती है चिंगारी बिखर निकलती है !!
गुमसुम बैठे हाथ बाँधे रहे अगर कंधा कैसे दे पाओगे
जो लिपटा है कफ़न में श्मशान कैसे पहुँचाओगे
कुछ तो कर्तव्य अपना भी दिखाना होगा
हर एक को मिलकर कंधे से कंधा लगाना होगा
वीरों को आता हैं आगे बढ़कर झुकने से पहले तिरंगा उठाना
काँधे पर चढ़कर नहीं आता जली अग्नि बिन बुझाए भाग जाना
ये सुगबुगाती अग्नि है जो जल्दी नहीं बुझ पाएगी
साझा कदम उठ गए तो अमृत ज़रूर बरसाएगी
जो शहीद हुए उनको माथे से लगाना आना
यही बीता इतिहास है दोहराना
जो बाक़ी है उसे प्रतिज्ञा से लिखेंगे
कदम से कदम मिले तो जीत हासिल कर लेंगे
जय हिन्द !!

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