“दोस्ती”
ख़ुशी में दोस्त, ग़म में दोस्त,
और तो और बेख़ुदी में दोस्त,
चंदन की ख़ुशबू में लिपटी,
ज़िन्दगी में मिश्री सी घुल जाती है दोस्ती,
रिवायत-ए-दोस्ती खुशियों की शहनाई है,
पग डगमगाए अगर, धुँधला-धुँधला सा नज़र आए अगर,
साया बन साथ चलती नज़र आती है दोस्ती,
कम्बख़्त कहो,
या इनायत-ए-खुदा, ए-दोस्त तुझे कुछ भी कहो,
ज़िन्दगी में उमंग लिए हर मोड़ पर खड़ी साथ निभाती है दोस्ती
बेपरवाह बेफ़िक्र बड़ी खूबसूरती से दिल बहलाती है दोस्ती,
ग़मों को उड़ाकर दर्द सह लेती है
बेहद करीब बेहद अनमोल खुशियों की सौगात है दोस्ती
-अनिता चंद
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