

Live every moment... Love beyond words... Laugh everyday...
“वक़्त और इन्तज़ार”
इन्तज़ार सुखद हो,
चाहे !
इंतज़ार दुःख का हो,
समय-चक्र से बँधे हैं
दोनों पहलू
वक़्त निकल तो जाता है,
पीछे सीख दे जाता,
एहसास व अनुभव
की छाप बनकर
जो साथ ज़िन्दगी में,
सुख और दुःख की
परछाई बनकर पीछा करते हैं
ज़िन्दगी की यादें बनकर !
-अनिता चंद 2018
नयी आशाएँ “नेत्रदान”
मेरा दिल आशाओं का समन्दर है, दिल की गहराइयों में
लहरों से बातें करती हूँ मैं !
मनमोहक धरा….में जब बारिश की बूँदें लुप्त हो जाती हैं,
वो मिट्टी में मिली बूँदों की सौंधी-सौंधी सुगन्ध,
मेरे ह्रदय व मनमस्तिष्क को भीतर तक भिगो जाती है !
नदियों….से निकली कल-कल, छल-छल की ध्वनि,
मुझे प्रेम के गीत सुनाती है, मैं राग में बँधती जाती हूँ,
उस सरगम के सप्तस्वर को ह्रदय में पिरोकर,
दिल की आवाज़ से मैं गुनगुनाती हूँ !
मधुवन….में जब पुष्पों पर भँवरे मँडराकर गुंजन करते हैं,
तब अंतर्मन से मधुरस का रसपान कर, आकाश में उड़ने लगती हूँ
मेरा दिल आशाओं का समन्दर है, लहरों से बातें करती हूँ मैं !
पथ….पर अग्रसर जब होती हूँ, तब कोई देवदूत मिल जाता है मुझको !
मार्गदर्शन कर वह पथ पर, राह तक पहुँचा जाता है मुझको,
इतना ही नहीं, करम उस सर्वशक्ति का….!
वो अपनी दिव्य ज्योति जीते जी नाम मेरे करने व
नेत्र दान करने का फ़ैसला कर जाता है,
मुझ नेत्रहीन….को आशाओं के नेत्र मिल गए हों जैसे,
इस अहसास मात्र से ही, धन्य-धान्य हो जाती हूँ मैं !
सपनों में रोशनी के पंख लगाकर, आसमान में उड़ने लगती हूँ मैं,
मेरा दिल आशाओं का समन्दर है, लहरों से बातें करती हूँ मैं !
हूँ जीवित मैं, तो बहुमूल्य हैं नेत्र, मैं नहीं तो किस काम के नेत्र,
नेत्र दान आशाओं का दान, ख़ुशियों का दान,
उमंगों का दान, पवित्र दान, महादान….!
दान की आशा करती हूँ मैं
दिल की गहराएयों से बातें करती
-अनिता चंद🙏🏼 2018
“दोस्तानें”
ये दोस्ताने भी क्या
दोस्ती के दीवाने होते हैं,
जब मिल जाऐं
दो दोस्त,
क़िस्से बीती बातों के,
रोचक व पुराने होते हैं।
🍃🌹
जीवन की रफ़्तार में,
साल यूँ हीं बदल जाते हैं,
मुद्दत्ते हो गईं मुलाक़ाते किए,
जब भी मिलते हैं दोस्तों से,
आप से अबे तक पहुँचकर,
वही पल गुज़री यादों के,
पैमानों के निशाने
होते हैं।
🍃🌹
दिखाते हैं तमीज़,
दुनिया को दिखाने के लिए,
मिल जाऐं एक बार,
तो वही बेहुदगी के,
बहके नज़राने होते हैं।
🍃🌹
देखकर किसी की
दोस्ती,
बॉय फ़्रेंड,गर्ल फ़्रेंड
उस पर तानें-कसी के
फ़िज़ूल चटकारे होते हैं
🍃🌹
हर दोस्त शातिर
नहीं होता,
दोस्ती की पट्टी-पटाने में,
पर निभाने और मिलने के
कई बहाने होते हैं।
🍃🌹
सच्चाई ये भी है यारों
रिज़ल्ट ख़राब हो जायें
अपना,
ग़म उतना नहीं,
मगर!!
अव्वल अगर दोस्त
आ जाए तो,
मायूसी से भरे सारे
दोस्ताने होते हैं।
🍃🌹
खाने की चाह है इसकी
परवाह नहीं,
खाने के मज़े तो दूसरों,
के टिफ़िन चुराकर
उड़ाने में होते हैं।
🍃🌹
मम्मी-पापा के पहरे
चाहे सख़्त हो कितने,
मगर!
उनको पटाने के,
लाख बहाने होते हैं।
🍃🌹
ना है कल की आरज़ू,
ना रहता आज की ग़म,
मिलकर साथ,
मौज मस्ती से दिन बिताने
होते हैं।
💰🎉
क़ीमती चीज़ों का शौक
तो रखते हैं हम,
पर बिछड़े-पुराने दोस्त,
कुबेर के ख़ज़ाने होते हैं।
-अनिता चंद 2018

“इश्क़” ❤
दिल से…मेरी मोहब्बत ने तराशी है तसवीर तेरी,
तुझे याद न करूँ ऐसे बहाने नहीं आते मुझे
मेरी हर साँस में बसी हैं यादें तेरी
तूने आँखों में मेरी, घर अपना बसा रखा है
मेरी नींदों पर हक़ अपना जमा रखा है
मेरी पलकों पर भी अधिकार है तेरा
तुझसे रुँठने के बहाने भी नहीं आते मुझे
दिल बहलाने के लिए रूठ जाऊँ जो कभी
गिला तुझसे करूँ तो क्या करूँ
रुठने की सज़ा भी ख़ुद ही पाता हूँ मैं
हर तरफ़ तेरी छबि दिखाई देती है मुझे
हर बुराई को नज़र अन्दाज़ कर जाता हूँ मैं
क्यूँकि तेरी बुराई में भी नेकी के
तराने नज़र आते हैं मुझे
तुझसे दूर रहने के बहाने भी नहीं आते मुझे
हर तराने में तसव्वुर है तेरा
तुझे पा लूँ ऐसी ख़्वाहिश भी नहीं मेरी
तुझसे दूरी के बहाने अगर सोच भी लूँ मैं
पर बहाने बनाने नहीं आते मुझे
अहसास ही काफ़ी है गुनगुनाने के लिए
मेरे ज़हन में रहती है तू दिन-रात की तरह
मेरी मोहबत ने तराशी है तसवीर तेरी
बड़ी शिद्दत से जड़ा है दिल के आइने में तुझे
आठों प्रहर इबादत की है तेरी ,,,,।
❤❤
-अनिता चंद 14-02- 2018
होली तो होली रे
ख़ुशियाँ पाबंद नहीं किसी की,
फिर भी मौक़े की तलाश तो रखती हैं
पर्व की महत्ता रहे जीवन में
मिलन की आस तो रखती है !
रंगों का करिश्मा भी क्या है भाई
मिल जाऐं एक दूसरे में सब तो
प्रीति-प्रणय का रंग बन जाऐ
होली अस्तित्व में अनुराग बरसाए !
आस रख तेरे जीवन में
आज रंग कोई भी भर देगा
गुज़ियों की मिठास लिए
संगीत के तराने सुनाकर
दिल ख़ुशियों से भर देगा
देखो होली है आई
तिमिर मिटाकर दुःख तनाव का
पूर्णिमा के चाँद सी चाँदनी है छाई
खुला दरवाज़ा आनंदोल्लास का
देखो होली है आई
आज पराया कोई न होगा
एक अंदाज़ में सब रंग होंगे
प्यार के गुलाल में छिपे कपोल
ख़ुशियों का नया आग़ाज़ कर देंगे
महक उठेगा मुबारकों की गूँज से
भूले बिछड़े सब अपनों को याद कर लेंगे
पास न हो कोई अज़ीज़ तो क्या !
दूर आवाज़ से ही दिल भर लेंगे !!
होली वर्ष में एक बार आए
रंगों की फुहार से
गुज़ियों की मिठास से
झोली में हर्षउल्लास भर जाए
होली तो होली रेरेरेरेरेरेरे
-अनिता चंद 03/03/2018
बेवजह बिन कहे चली जाती है,
सबको सदमे में छोड़ जाती है
जिस देह को हम अपना कहते हैं
उससे भी एक पल में बेवफ़ाई
कर जाती है
“मौत”
इसका न कोई अपना
न ही कोई पराया है
रहस्यमय अध्याय है
हर एक से अनजान है
न जाने कब छल कर जाए
“मौत”
बेपरवाह है पर अनमोल है
हर पल नई सीख है ज़िन्दगी
साथ है साँसों का
तो ख़ुशनुमा है
साथ छोड़ दे तो
यादों का मंज़र है
“ज़िन्दगी”
कुछ अहसास तले,
कुछ अरमान तले
हर दिन नई उमंग में
बिंदास जीते हैं हम
जीना-मरना जब हाथ नहीं
बेफ़िक्र होकर
ज़िन्दगी-मौत के बीच
तालमेल बनाकर
ख़ूबसूरत जीवन बना लेते हैं लोग
आत्मा अमर है इसी का नाम है
“सत्य”
-अनिता चंद 25/02/ 2018
“कौन कहता है मौत आयेगी तो मर जाऊँगा,
मैं तो दरिया हूँ समन्दर में उतर जाऊँगा”
पंछी-
प्रातः नमन चह-चहकना,
फिर अम्बर में उड़ जाना
शाम हुई झुंड बनाकर,
वापस अपने बसेरे का रूख ले,
उसी दरख़्त में समा जाना ।
सुकूँन की साँसें लिए ये दोहराना !
इस धरा पर मेरा भी है आशियाना,
बस ! यह अहसास ही काफ़ी है
डूबती शाम को पनाह मिल जाए,
कर्म ऐसा कर जा ! ऐ इंसाँ,
कि जीवन व्यतीत न हो, बल्कि
मनमोहक जीवन जीने का,
बहाना बन जाऐ !
ईंट-पत्थर से बनता है मकान,
घर बनाने में उम्र गुज़र जाऎ !
ख़ुशहाल बसे निवास की ख़ुशी का
अहसास ही काफ़ी है ।।
बेज़बान पंछी भी जानता है
अपना वो ठिकाना !
दिनभर सैर-सपाटा कर,
छूँकर अम्बर,वापिस पहुँच ही जाता है
जहाँ उसे है जाना !
इन्सान हों, या हों परिंदे,
हाँ, यह अहसास !
धरा पर मेरा भी है आशियाना,
यह अहसास ही काफ़ी है !!
-अनिता चंद /2018
बदल रहा है साल मेरा,
उमंगों के बुलबुले लेकर,
ख़्वाहिशों के महल बनाऊँ,
ऐसा दिली आरज़ू है मेरी !
समय गतिमान है,
बड़ा ही बलवान है,
समय से बडा ना कोई,
समय !
कभी हँसाता है हमें,
तो कभी रुलाता है हमें,
नई-नई चालें चल,
फिर उन पर ही नचाता है हमें,
भूल जाएं बुरा सब आज,
याद रखें सूख के वो पल,
आओ मिलकर ख़ुशियाँ मनाएँ,
स्वागत करें नूतन वर्ष का हम,
नव वर्ष आपके जीवन में,
इतनी ख़ुशियाँ लेकर आए,
कि आपका जीवन फूलों,
से भर जाए !!
दामन में हों आपके,
ख़ुशियाँ ही ख़ुशियाँ
ऐसी कामना मैं
करती हूँ !
नववर्ष मंगलमय हो !!
***-अनिता चंद /2018